Sunday, 1 May 2011

ताबूत घोटाले के जनक का नया घोटाला

  
         भ्रष्टाचार के खिलाफ जन्तर-मन्तर पर अनशन करके जन लोकपाल बिल की ड्राफ्टिंग कमेटी में जगह पाने वाले अण्णा हजारे सेना से ही सेवा निवृत हुए हैं। सेना में किस कदर और कितना भ्रष्टाचार है, उसका भी खुलासा हजारे साहब को करना चाहिए। जहॉं एक ओर उच्चतम न्यायालय की गिरती साख को वहॉं के मुख्य न्यायाधीश समेत कुछ अन्य न्यायाधीशों ने काफी हद तक संभालने की कोशिश की है, सेना में भी व्याप्त जबरदस्त भ्रष्टाचार को खत्म करने की पहल सेना के ही सेवा निवृत अण्णा हजारे को करनी चाहिए.
        देश के बजट का एक-चैथाई हिस्सा जिस सेना को दिया जाता हो और उसका कोई आडिट भी ना हो वह भी भ्रष्टाचार की श्रेणी में ही आता है अथवा नहीं, गम्भीर चिन्ता का विषय है। गोपनीयता के नाम पर देश की सुरक्षा के लिए बनाई गई इस एजेन्सी में चारों ओर भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार है। चाहे राशन की खरीद हो या उसका वितरण। चाहे उपकरण की खरीद हो अथवा टैंक की। चाहे वर्दी खरीदनी हो अथवा वर्दी सिलवानी हो। गाड़ी खरीदनी हो या अण्डे। मामला काम लेने का हो या छुट्टी देने का, सभी ओर भ्रष्टाचार का बोलबाला है। आदर्श सोसाईटी का मामला पूरे देश की आँखों के सामने है। यह सोसाईटी अण्णा साहब के महाराष्ट्र प्रदेश के मुम्बई में बनी थी। सेना का बड़े-से-बड़ा अधिकारी इस घोटाले में संलिप्त पाया गया, फिर भी वे सारे अधिकारी सेवा में हैं।
       जिस देश की सेना के ब्रिगेडियर,मेजर जनरल,लेफ्टिनेंट जनरल जब एक-एक फ्लैट के लिए भ्रष्ट आचरण करने को तैयार हैं, तो वो देश को कब का गिरवी रख चुके होंगे। जिस तरह देश के बजट का एक-चैथाई हिस्सा इनको दिया जाता है उसी तरह जन लोकपाल बिल में एक-चैथाई हिस्से में इनके लिए व्यवस्था होनी चाहिए। भ्रष्टाचार में सेना का जितना बड़ा अधिकारी पकड़ा जाये उसको सेवा से बर्खास्त करते हुए उसकी सारी सम्पत्ति जब्त करते हुए उसे 10, 20 या 30 वर्ष का कठोरतम कारावास दिया जाये तथा लाल किले में निरूद्ध किया जाये। सितम्बर 2011 तक 300 करोड़ रूपये के 10,800 नाईट विजन डिवाईस (रात में देखने की क्षमता वाले यंत्र) खरीदे जाने हैं। सेना के जिन लोगों को दिन में ही दिखाई नहीं दे रहा, उन्हें रात में देखने की आवश्यकता ही क्या है। रात में जो कुछ भी गलत होता है, वह दिन में किये गये की परिणति ही तो होती है।
        2009 से खरीदे जा रहे इन घटिया यंत्रों को लेकर सुरक्षा बलों में अधिकतम असंतोष है। पिछले दिनों केन्द्रीय गृह मंत्रालय की एक बैठक में उस नाईट विजन डिवाईस की खरीद पर चर्चा हुई थी, जिसमें फिर से भारत सरकार के उद्यम, भारत इलैक्ट्रानिक्स लि0 को अधिकृत करने की रणनीति तय की गई। कुछ अर्धसैनिक बलों के मुखिया ने इसका कड़ा विरोध किया तथा टैण्डर के माध्यम से यंत्र खरीदे जाने की बात कही। ध्यान रहे कि पूर्व में ढाई हजार करोड रूपये के जो यंत्र खरीदे गये वे एकदम घटिया थे । ऐसे यंत्र हमारे सुरक्षा बलों को मुहैया कराना उनकी जिन्दगी के साथ खेलना है। इस सौदे को मंजूर कराने के लिए फर्जी ट्रायल का सहारा लिया गया। ज्ञात हो कि गृह मंत्रालय मे निदेशक रैन्क के अधिकारी आर0एस0शर्मा ने इस सौदे को अंतिम मंजूरी दिलाने में प्रमुख भूमिका निभाई। यह वही शर्मा हैं जिन्हें पिछले वर्ष घटिया बुलेट प्रूफ जैकेट खरीद घोटाले में गिरफ्तार किया गया था। बावजूद इसके शर्मा जी की बल्ले - बल्ले है।
       देखिये खरीददारी से पहले उपकरण की ट्रायल का आयोजन किया गया तो वह गुड़गांव में। जिन उपकरणों का इस्तेमाल होना था बीहड़ जंगलों में वह भी रात में, उनका परीक्षण दिन में हो रहा है गुड़गांव जैसे मल्टी-नेशनल सिटी सेन्टर में।गुड़गांव में हुए इस ट्रायल से कई अफसर संतुष्ट नहीं थे तथा कई आपत्तियां जताई गई थीं, जिसे रद्दी की टोकरी में डालते हुए रक्षा मंत्रालय के उद्यम बीईएल को 34 हजार उपकरणों की खरीद का ठेका दे दिया गया। ये नाईट विजन डिवाईस, राइफलों पर लगानी थी। आश्चर्य की बात तो यह है कि बीईएल इन यंत्रों को नहीं बनाता है, उसने तो इजराइली कम्पनी ‘प्रिज्मटेक’ से एमओयू किया है और अपना 90 प्रतिशत आर्डर उसे ट्रान्सफर कर दिया। इससे भी ज्यादा अंधेर यह कि प्रिज्मटेक के पास भी इन नाईट विजन डिवाईस में इस्तेमाल होने वाली ट्यूब को बनाने की तकनीक नहीं थी। दुनिया में इस ट्यूब को बनाने की अव्वल कम्पनी फ्रांस की ‘फोटोनिस’ है।
       इजराइली कम्पनी प्रिज्मटेक ने फोटोनिस कम्पनी से मात्र 2000 ट्यूब ही खरीदीं, लेकिन बीईएल की मार्फत भारत को 14 हजार यंत्र सप्लाई किये। यानी बांकी के 12000 यंत्रों में किसी दूसरी कम्पनी की ट्यूब लगी थीं। इन उपकरणों की लाईफ 10 वर्ष बताई गयी थी, किन्तु 12 प्रतिशत यंत्र ढाई वर्ष में ही खराब हो गये। ये तगड़ा गोल-माल है, जिसमें गृह मंत्रालय एवं रक्षा मंत्रालय दोनों मिले हुए हैं। 
 सतीश प्रधान   

1 comments:

Anonymous (Malaysia) said...

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