Sunday, 1 May 2011

मनमोहन सिंह को रिप्लेस कीजिए राहुल जी

    राहुल जी अपनी यांत्रिक ऊर्जा का इस्तेमाल एनआरएचएम (नेशनल रुरल हेल्थ मिशन के लिए आरटीआई के तहत सूचना मांगने में जाया करने के बजाय एमएमएस (सरदार मनमोहन सिंह) को हटाने में कीजिए। कांग्रेस पार्टी के महासचिव और श्रीमती सोनिया गॉंधी के सुपुत्र राहुल गॉंधी यदि अपनी ऊर्जा 3200 करोड़ रुपये के एनआरएचएम घोटाले के लिए आर.टी.आई. के तहत सूचना मांगने के स्थान पर इस देश को खोखला कर रहे लाखों-लाख करोड़ के घोटाले को पूरी तरह से उजागर करने और वतन के साथ गद्दारी करने वालों को सींखचे में पहुंचाने और उनकी सम्पत्ति को जब्त कराने में करते तो पूरा भारत उन पर नाज़ ही नहीं करेगा अपितू उन्हें स्वयं इस देश की गद्दी सौंप देगा।
    उत्तर प्रदेश की जो सरकार उनके वश में नहीं है, वहॉं किये जा रहे द्योटाले एवं उसमें किये गये दो-दो मर्डर पर चिंतित होने की वजह से वह दिवंगत दोनों सीएमओ के परिवार वालों से मिलने उनके घर भी गये। यह अच्छी बात है, लेकिन उनके प्रति कुछ करने के बजाय राहुल का यह कृत्य राजनीति से ओत-प्रोत ही दिखाई दिया। पता नहीं कोई नेता उतने से क्यूं संतुष्ट नहीं होता जितना उसे आसानी से मिला हुआ है। केन्द्र की सरकार भ्रष्टाचार के दलदल में सनी पड़ी है और उसकी पार्टी का महासचिव प्रदेश सरकार के पीछे पड़ा है।
    राहुल एवं सोनिया को पूरा भारत मिला हुआ है, लेकिन वहॉं हो रहे 2-जी स्पैक्ट्रम घोटाले, कलमाड़ी कॉमनवेल्थ गेम्स घोटाले, देशी नस्ल के विदेशी घोड़े हसन अली का घोटाला, सेना का घोटाला, नकली करेन्सी का घोटाला, गृह मंत्रालय का नाइट विज़न घोटाला, स्टाम्प घोटाला, खाद्यान्न घोटाला, सेना का सूती दरी घोटाला, कारतूस घोटाला और घोटाले मे घोटाला ना तो दिखाई दे रहा है और ना ही आजतक उसपर एक भी शब्द बोलते सोनिया या राहुल को देखा गया है। 1984 के दंगे में जो सिखों के साथ किया गया है, उसे इण्डियन सरदार मनमोहन सिंह जी भूले नहीं हैं! अब सत्ता उनके हांथ में है। उन्होंने पूरे हिन्दूस्तान की ऐसी की तैसी न कर दी तो मेरा भी नाम सतीश प्रधान नहीं।
    सारे घोटाले की जानकारी पीएमओ कार्यालय को रही है, लेकिन उसकी जानकारी प्रधानमंत्री को यदि नहीं रही तो ऐसे प्रधानमंत्री की इस देश को क्या आवश्यकता? और यदि जानकारी रहने के बाद भी वह कुछ करने की स्थिति में नहीं थे, तब भी ऐसे प्रधानमंत्री से देश को क्या फायदा ? बावजूद इसके मनमोहन सिंह को कुछ लोग ईमानदार बताते हैं, इसका सीधा मतलब है कि या तो वह उनसे डरते हैं अथवा वे भी हीं कहीं न कहीं से करप्ट हैं।
    देश में दिन-प्रतिदिन मॅहगाई बढ़ रही है, लेकिन अर्थशास्त्र के महापिता माने जाने वाले मनमोहन सिंह कहते हैं कि मुद्रा स्फीति की दर कम हो रही है। भारत में ऐसे अर्थशास्त्र को कायम रखने वाले तो अमेरिका और इंग्लैण्ड के पोषक ही हो सकते हैं। मनमोहन सिंह एण्ड कम्पनी ने खूब इस देश को बेवकूफ बना लिया, इसका खामियाजा राहुल और सोनिया को ही भुगतना पड़ेगा। यदि राहुल गॉंधी को उ0प्र्र0 में कुछ सीटें चाहिए तो उन्हें यह दिखाना ही पड़ेगा कि वे ईमानदार हैं और इसके लिए उन्हें 2-जी स्पैक्ट्रम में बांटे गये सारे लाइसेन्स कैन्सिल कराने होंगे। इस काले और अनुचित व्यापार से कमाई गई सम्पति की दस गुनी धनराशि इन उद्योगपतियों से वसूलनी होगी तथा इन सारे भ्रष्टों को कम से कम बीस-बीस सालों के लिए सलाखों के पीछे डालना होगा।
    उत्तरप्रदेश में राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन में की जा रही बंदरबांट के लिए केन्द्र सरकार भी कम दोषी नहीं है। हजारों-हजार करोड़ रुपये एनआरएचएम, मनरेगा, आदि योजनाओं में झोंकना, भ्रष्टाचार को नीचे के स्तर तक पहुचाने के अलावा और कुछ नहीं है। अब तो एक और घोटाले की नींव रख दी मनमोहन सिंह ने। विश्व बैंक की 7000 करोड़ की मदद से गंगा नदी को साफ करने की योजना को मंजूरी मिल गई है। कोई बताये भारत का कौन सा ऐसा बैंक है जो नॉन प्रोडक्टिव आइटम पर लोन देता है? शायद एक भी नहीं बल्कि कन्फर्म तौर पर एक भी नहीं, लेकिन विश्व बैंक, रोड़ बनाने के लिए, तालाब खेादने के लिए, गंगा सफाई के लिए, नहर की सफाई के लिए लोन देता है, केवल इसलिए की आप उसके कर्जदार बने रहें और जैसा वल्र्ड बैंक डिक्टेट करे वैसी नीति आप भारत में लागू करते रहें।
    गंगा सफाई की जिम्मेदारी नेषनल गंगा रिवर बेसिन अथॉरिटी को सौंपी गई है, जबकि यह संस्था स्वंय ही दूसरे विभागों पर निर्भर करती है। कुल लागत में से 5100 करोड़ रुपये केन्द्र सरकार वहन करेगी, जबकि शेष 1900 करोड़ रुपये का इंतजाम उ0प्र0, झारखण्ड, बिहार और पश्चिम बंगाल की सरकार को करना होगा। अब यदि ये राज्य सरकारें इतने रुपये एकत्र करने को मना कर दें तो भी सच मानिये ये सारे रुपये विश्व बैंक दे देगा, लेकिन राज्य सरकारें ऐसा नहीं करेंगीं, क्योंकि उनको डर रहेगा कि यदि ऐसा नहीं किया तो केन्द्र से मिलने वाले रुपये डूब जायेंगे और वह बंदरबॉंट कैसे करेंगे। विश्व बैंक 4600 करोड़ का लोन देकर कितने लाख करोड़ की चपत इस हिन्दुस्तान को लगायेगा इस अर्थशास्त्र को पब्लिक को समझाने वाला कोई एक भी नेता इस भारत में दिखाई नहीं देता।
    यदि राहुल गॉधी एवं सोनिया गॉधी को उ0प्र0 में कुछ सीटें चाहिए तो उनकी पार्टी जो पूरे भारत में राज कर रही है, उसकी कारगुजारियों पर उन्हें लगाम लगाने के साथ ही जो भ्रष्ट हैं उनकी सम्पत्ति जब्त कराकर उन्हें जेल भी भिजवाना होगा, फिर चाहे ये कलमाणी हों या शरद पवार। वरना अण्णा हजारे की आंधी कांग्रेस को कहॉं ले जाकर पटकेगी अन्दाजा लगाना मुश्किल है। यदि मनरेगा में आवंटित धन की भी जॉंच कर ली जाये तो बहुत बड़ा द्योटाला वहॉ भी मिल जायेगा। एनआरएचएम घोटाले की जॉच के लिए किसी आर.टी.आई. आवेदन की आवश्यकता नहीं है। सारा पैसा केन्द्र का है और केन्द्रीय बजट से आवंटित धन की जॉंच के लिए सीबीआई स्वतन्त्र है एवं उसके सीधे नियंत्रण में है। इसमें किसी से सिफारिश की आवश्यकता नहीं है। केन्द्र के लिए सीबीआई वैसा ही तन्त्र है, जैसा उ0प्र0 के लिए उसकी सीबीसीआईडी। 
बाकी बात रही राजनीति की तो वह तो राहुल द्वारा की ही जा रही है। मदारी का खेल जनता खूब समझ रही है। इसलिए राहुल जी अपना ध्यान राइट डायरेक्शन में लगाइये, अगल-बगल के चमचों के चक्कर में कभी रामकली और कभी धनिया के यहॉं घूमने की जरुरत नहीं है। मनमोहन को हटाने में अपना दिमाग लगाइये। आपको किसी भ्रष्टाचार को ढूंढ़ने के लिए किसी भी प्रकार का आवेदन करने की जरुरत नहीं है। माननीय उच्चतम न्यायालय स्वंय ही भीमकाय मगरमच्छों को हरकारा लगाकर प्रवर्तन निदेषालय के पाले में डाल चुका है। आपको तो इन मगरमच्छों की अम्मा को ढूंढ़ना है, और उसे भी सुप्रीम कोर्ट के हवाले कर देना है, क्योंकि कालाधन तो वे हवाला के हवाले कर ही चुके हैं।
    आप तो इतना कीजिए कि कांग्रेस संगठन से इस्तीफा दीजिए और 2-जी स्पैक्ट्रम में आवंटित लाइसेन्स को रद्द कराने, लाइसेन्स लेकर विदेशी कम्पनी को बेचने पर हुई कमाई के दस गुने की रिकवरी तथा स्विस बैंक में जमा धनराशि को भारत में लाने की मुहिम का नेतृत्व कीजिए, देखिए क्या चमत्कार होता है। भारत की जनता आपको खुद भारत की गद्दी सौंप देगी। यह बात आपको हजम नहीं होगी क्योंकि कांग्रेस में ऐसे नेता नहीं हैं जो धरातल पर हों, वह तो एरिस्टोक्रेसी में जी रहे हैं। आपके नेता जो विधान सभा में मुख्यमंत्री से गिड़गिडाकर हैण्डपम्प मांगते हैं, उसे वे कहॉं लगवाते हैं, खोज का विषय है, लेकिन रायबरेली की तस्वीर आपके सामने है कि वहॉं कहॉं हैण्डपम्प लगे हैं। यह हाल तो है आपकी मम्मी के संसदीय क्षेत्र का बाकी का जानने की जरुरत ही कहॉं है आपको!
    पूरा पीएमओ कार्यालय ही भ्रष्टाचार के इत्र से महका हुआ है और लोग कह रहे हैं कि मनमोहन सिंह इत्र से अछूते हैं। यह कैसे सम्भव हो सकता है। यह तो तभी सम्भव है जब मनमोहन सिंह कोमा में हों, और ना तो उन्हें दिखाई दे रहा हो, ना ही सुनाई दे रहा हो, ना ही कुछ लिख-पढ़ सकते हों, ना हिलते हों, ना बोलते हों, ना डोलते हों। और यदि ऐसा है तो ऐसे प्रधानमंत्री को विदाऊट डिले हटा दिया जाना चाहिए। यह देश की सेहत के साथ बहुत बड़ा धोखा है। इतने साल से घट रही सारी कहानी को देखते हुए मैं तो इसी निष्कर्ष पर पहुचा हूं कि मनमोहन सिंह नरसिम्हाराव के भी बाप हैं।
    देखिए भारत की जनता को दिखाने के लिए वायु सेना के लिए 126 लडा़कू विमान खरीद में अमेरिका और रुस की दावेदारी को खारिज करते हुए यूरोप को चुना गया है। करीब 50,000 करोड़ के 126 लडाकू विमान के सौदे में दो अमेरिकी कम्पनियों बोइंग और लॉकडीह मार्टिन को शामिल न किये जाने से निराश व्हाइट हाऊस ने कहा है कि इससे अमेरिका और भारत के सम्बन्धों पर असर नहीं पड़ेगा, यदि सम्बन्धों पर असर नहीं पड़ना है तो यह कहने का क्या औचित्य? यह तो आधारशिला है किसी बड़ी साजिश की वरना तो भारत में अमेरिकी राजदूत टिमोथी रोएमर ने इसी कारण से पद छोड़ने का ऐलान किया है। रोएमर ने कहा कि खरीद प्रक्रिया में अमेरिकी कम्पनियां के बाहर होने की सूचना से उन्हें गहरा आद्यात लगा है। इसी कड़ी में भारत ने इस साल अप्रैल में खत्म हो रही कम्पनियों की निविदाओं की मियाद को देखते हुए, दौड़ में मौजूद फ्रेंच कम्पनी राफेल और ईएडीएस ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी और इटली की विमान निर्माताओं के संयुक्त उपक्रम-यूरोफाइटर को अगले दो सप्ताह में अपनी निविदाओं की अवधि बढ़ाने के लिए कहा है। ज्ञात हो कि भारत बीते दो सालों में इस सौदे से बाहर हुई अमेरिकी कम्पनी लॉकडीह मार्टिन से सी-130 जे सुपर हरक्यूलिस विमान खरीद चुका है, तब किसी को कानों-कान खबर नहीं हुई थी।
lrh'k iz/kku

1 comments:

Anonymous (India) said...

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