Tuesday, 15 November 2011

क्रिकेट खेल है या कैसिनो


Casino Games with cheer Girls
      क्रिकेट की हालत देखकर क्रिकेट प्रेमियों ने कहना शुरू कर दिया है कि क्रिकेट अब आनन्द 
का विषय नहीं रहा। सही भी है, रहेगा भी कैसे? जब खेल को आप व्यापार बना देंगे
तो फिर उसमें आनन्द कहॉं! आईये आज से शुरू करते हैं क्रिकेट का अध्याय।

N. Srinivasan, President, BCCI & Vilas Rao Deshmukha, a Minister of India. 

क्रिकेट के स्टेडियम अब खाली दिखते हैं। टी0वी0 पर क्रिकेट की जगह लोगों ने मनोरंजक कार्यक्रम देखने शुरू कर दिये हैं, जबकि वहॉं भी भोण्डापन ही परोसा जा रहा है, पर मरता क्या न करता वाली स्थिति में ही दर्शक जीने को मजबूर हैं। भारत, जो दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट प्रेमी देश है, उसमें क्रिकेट को संचालित करने वाली संस्था बीसीसीआई (बोर्ड ऑफ कन्ट्रोल फॉर क्रिकेट इन इण्डिया) ने उसे उस मुहाने पर ला खड़ा किया है जहॉं से दोबारा पूर्व स्थिति में पहुंचना बहुत टेढ़ी खीर है। और ऐसा हुआ है क्रिकेट में घुस गये राजनीतिज्ञों के कारण। शरद पवार, राजीव शुक्ला, अरुण जेटली, ललित मोदी, विलास राव देशमुख आदि ने इसे सोने का अण्डा देने वाली मुर्गी बना दिया है एवं क्रिकेट प्रेमियों को अण्डा खरीदने वाला ग्राहक। इतने पर भी जब राजनीतिज्ञों को संतोष नहीं हुआ तो इन्होंने मुर्गी भी अपने हिसाब से पैदा करनी शुरू कर दी और अण्डों की मैन्यूफेक्चरिंग भी करने लगे। 
M.S.Dhoni, Captain, Indian Cricket Team & Chennai Super Kings with  N.Srinivasan,President,BCCI.

हफ्तों का मैच सिमटाकर 20-20 पर ले आये। खिलाड़ियों को मुर्गी बनाकर उनसे 20-20 ओवर में सोने के अण्डे देने की चाहत रखने लगे। आपलोग देख ही रहे हैं कि क्रिकेट के नाम पर कौन-कौन सा खेल खेला जा रहा है। इसमें चीयर्स गर्ल्स घुसा दी गईं, जैसे कैसिनो में पीयर्स गर्ल्स होती हैं, ठीक उसी तर्ज पर। गोया यह क्रिकेट नहीं कैसिनो हो गया है। क्रिकेट को इन नेताओं ने कैसिनो में तब्दील कर दिया है। यही कारण है कि अब क्रिकेटर की जगह आपको फिक्सर क्रिकेटर अपनी ऑखों से देखने पड़ रहे हैं। क्रिकेटर के बारे में तो आपसे अच्छा कौन जानता है, लेकिन अब जानिए फिक्सर क्रिकेटर के बारे में।
Sharad Pawar, a sh rued politician, Agriculture Minister of India  & President of ICC.

          क्रिकेट के इतिहास में आपराधिक सजा का पहला मामला विश्व के क्रिकेट प्रेमियों के सामने अब आया है। इससे पूर्व ब्रिटेन की अदालत में धोखाधड़ी के लिए खिलाड़ियों को सजा सुनाने का एकमात्र मामला 1964 में सामने आया था, जब तीन फुटबॉलरों को मैच गंवाने के लिए जेल की सजा सुनाई गई थी। वर्तमान में क्रिकेट के मैदान पर संदिग्ध आचरण के लिए, पाकिस्तान के पूर्व कप्तान सलमान बट और उनके दो साथी, तेज गेंदबाज मुहम्मद आसिफ और मुहम्मद आमेर, भ्रष्टाचार के लिए सजा पाने वाले विश्व के पहले क्रिकेटर बन गये हैं। स्पॉट फिक्सिंग का दोषी पाए जाने पर, साजिश रचने और अवैध धनराशि लेने के कारण सलमान बट को 30 महीने, जालसाजी का दोषी पाये जाने पर मुहम्मद आसिफ को 12 महीने और गलत काम में साथ देने का दोषी पाये जाने पर मुहम्मद आमेर को 6 महीने तथा भ्रष्ट आचरण का दोषी पाये जाने के कारण बुकी मजहर मजीद को 32 महीने की जेल की सजा से नवाजा गया है। जबकि आई0सी0सी0 (इण्टरनेशनल क्रिकेट काउन्सिल) ने सटोरिये मजहर मजीद और तेज गेंदबाज मुहम्मद आमेर के साथ मिलकर लार्ड्‌स टेस्ट के दौरान जानबूझकर नो-बॉल फेंकने की साजिश रचने के लिए सलमान बट को 10 साल, मुहम्मद आसिफ को 7 साल और मुहम्मद आमेर को 5 साल के लिए खेल से प्रतिबन्धित किया है। ये दोनों ही सजायें साथ-साथ चलेंगी।
          लन्दन की साउथवर्क कोर्ट के न्यायमूर्ति कुक की टिप्पणी वास्तव में प्रशंसनीय एवं सराहनीय है, और इस कृत्य की गंभीरता की ओर इशारा करती है कि- जिसे कभी खेल समझा जाता था, वह अब व्यवसाय बन गया है। इसकी छवि और अखण्डता से सभी की नज़रों में नुकसान पहुंचा है, जिनमें कई युवा भी शामिल हैं, जो तुम तीनों (सलमान बट, मुहम्मद आसिफ और मुहम्मद आमेर) को हीरो समझते थे और तुम्हारी तरह खेलने की कोशिश करते थे। न्यायमूर्ति कुक ने कहा कि रियायत की अपील के बावजूद ये अपराध इतने गम्भीर हैं कि जेल की सजा ही उपयुक्त होगी। अपने साथियों को भ्रष्ट करने वाले सलमान बट को इस पूरे घोटाले का सूत्रधार कहा गया है। उन्होंने कहा, अब जब लोग मैच में हैरान करने वाली चीजें देखेंगे या कोई हैरानी भरा नतीजा आयेगा तो पैसे खर्च करके मैच देखने वाले खेल के प्रशंसक सोचेंगे कि कहीं यह मैच फिक्स तो नहीं है, या जो उसने देखा क्या वह स्वाभाविक था!
ऐसा नहीं है कि मैच फिक्सिंग कोई नवीन ईजाद है। यह तो आज से दो शताब्दि (दो सौ साल) पूर्व ही शुरू हो चुकी थी, जब क्रिकेट की शुरूआत भी नहीं हुई थी, तब 1817 में पहली बार मैच फिक्सिंग का मामला सामने आया था। नाटिंघम के बल्लेबाज विलियम लैंबार्ट पर मैच फिक्सिंग के लिए प्रतिबन्ध लगाया गया था, जिसके बाद वह फिर कभी क्रिकेट नहीं खेल पाये। मैच फिक्सिंग की दूसरी घटना 1873 की है जब सरे के खिलाड़ी टेड पुली ने वार्कशायर से हारने के लिए 50 पौण्ड लिये थे। इसके लिए सरे ने पुली को तब निलम्बित किया था।
पिछले एक दशक में कई देशों के क्रिकेट खिलाड़ियों को इस तरह के आरोपों के कारण प्रतिबन्धित किया गया है, उनमें हैं दक्षिण अफ्रीका के हर्शल गिब्स, जिन्हें वर्ष 2000 में भारत के खिलाफ नागपुर वनडे में कमजोर प्रदर्शन करने के लिए सहमत होने पर 6 माह का प्रतिबन्ध लगाया था। दक्षिण अफ्रीका के ही हैन्सी क्रोन्ये पर तो मैच फिक्सिंग और सटोरियों से पैसे लेने के कारण आजीवन प्रतिबन्ध लगा। दक्षिण अफ्रीका के ही हेनरी विलियम्स निकले जिन्हें वर्ष 2000 में खिलाड़ियों को रिश्वत की पेशकश का दोषी पाये जाने पर वर्ष 2008 से आजीवन पाबन्दी लगा दी गई।
 Cricket Writer peter Roebuck

क्रिकेट के सबसे सम्मानित कमेंटेटरों और लेखकों में से एक पीटर रोबक की केपटाउन के होटल में 13 नवम्बर 2011 को संदेहास्पद परिस्थितियों में लाश पाई गई है। दक्षिण अफ्रीकी पुलिस का कहना है कि उन्होंने होटल की छटी मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या की है। उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई थी। ब्रिटेन में जन्मे 55 वर्षीय रोबक ने 1980 के दशक में समरसेट की कप्तानी की थी। वे वहॉं आस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका के बीच टेस्ट सीरीज कवर करने गये थे। 
पाकिस्तान के क्रिकेट कोच बॉब वूल्मर की भी 2007 में वेस्टइंडीज में हुए विश्व कप के दौरान होटल के कमरे में ही रहस्यमय परिस्थितियों में मौत हो गई थी। वूल्मर की हत्या को भी कभी हत्या और कभी आत्महत्या करार दिया जाता रहा और उनकी मौत का रहस्य आजतक बरकरार है। कमोबेश यही स्थिति इस मौत की भी रहनी है। दक्षिण अफ्रीकी पुलिस का कहना है कि शनिवार 12 नवम्बर 2011 की रात्रि सवा नौ बजे यह घटना घटी है और आत्महत्या के कारणों की पड़ताल की जा रही है तथा इस मामले में कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। मामला यहॉं भी संदिग्ध नज़र आता है।
वर्ष 2000 में भारत के अजहरूद्दीन पर भी आजीवन पाबन्दी लगी, मामला अदालत में विचाराधीन है, लेकिन आजतक वे मैच नही खेल पाये। भारत के ही अजय शर्मा पर भी वर्ष 2000 में सटोरियों के साथ सम्पर्क रखने का देाषी मानते हुए आजीवन पाबन्दी लगी। भारत के ही अजय जडेजा पर वर्ष 2000 में ही सटोरियों से सम्पर्क का दोषी पाये जाने पर पांच साल की पाबन्दी लगी जो वर्ष 2003 में हटा ली गई, लेकिन वे आजतक एक मैच भी नहीं खेल पाये। भारत के ही धुरन्धर मनोज प्रभाकर निकले जिन पर वर्ष 2000 में सटोरियों से सम्पर्क का दोषी मानते हुए पांच वर्ष का प्रतिबन्ध लगा और उनकी आजतक वापसी नहीं हो पाई है।
केन्या के मौरिश औंडुबे को सटोरिये से धन लेने का दोषी पाये जाने पर पांच साल का प्रतिबन्ध लगा, जबकि वेस्ट इंडीज के मर्लोन सेम्युअल्स पर सटोरिये से धन लेने का दोषी पाते हुए दो साल का प्रतिबन्ध लगा और पाकिस्तान के अता-उर-रहमान एवं सलीम मलिक को वर्ष 2008 में सटोरियों से सांठ-गांठ के मामले में दोषी पाते हुए आजीवन प्रतिबन्ध लगाया गया। ऐसे हालातों के बाद कोई मूर्ख अथवा मूर्ख बनाने वाला ही स्टेडियम को हाऊस फुल देखने का ख्वाब संजो सकता है।
Green Park Cricket Stadium, Kanpur, U.P., India.

भारत में इन दिनों वेस्ट इंडीज की टीम दौरे पर है। जिसको तीन टेस्ट मैच और पाँच वनडे मैच खेलने हैं। पहला टेस्ट मैच हो चुका है और उसमें भारत विजयी रहा है। दूसरा 14 नवम्बर से कोलकाता में खेला जा रहा जिसमें भारत ने 5 विकेट पर 346 रन बना लिए हैं। इंग्लैण्ड के बाद इस सीरीज को भी दर्शकों के लाले पड़े हुए हैं। दिल्ली में खेले गये पहले टेस्ट मैच में स्टेडियम खाली पड़ा था जो क्रिकेट एसोसियेशन दिल्ली के कर्ताधर्ता अरूण जेटली की करनी पर आंशू बहा रहा था। 45 हजार क्षमता वाले फिरोजशाह कोटला स्टेडियम की दर्शक दीर्घा में बमुश्किल 10 हजार दर्शक होंगे और इनमें भी ज्यादातर फ्री पास वाले थे, जो दीर्घा को ज्यादा से ज्यादा भरने के उद्देश्य से लाये गये थे।
Feroz Shah Kotla Stadium, Delhi, India.
जानकारी मिली है कि कोलकाता के ईडन गार्डेन्स में हो रहे दूसरे और मुम्बई में होने वाले तीसरे टेस्ट मैच के लिए भी दर्शक ढूंढे नहीं मिल रहे हैं। कोलकाता में टिकट काउन्टर्स खाली पड़े हैं। मुम्बई में टिकट के दाम काफी कम कर दिये जाने के बावजूद काउन्टर खाली पड़े हैं। 
यही हाल वनडे मैचों का भी है। आगामी वनडे सीरीज के मैचों के भी टिकट अपनी बदहाली पर आंशु बहा रहे हैं। ये मैच कटक, विशाखापतनम, अहमदाबाद, इन्दौर और चेन्नई में होने हैं। इनमें से उत्तर प्रदेश तो राजीव शुक्ला की मेहरबानी से एकदम गायब हो गया है। राजीव शुक्ला क्या-क्या करेंगे? वे बीसीसीआई के वाइस प्रेसीडेन्ट हैं। इण्डियन प्रीमीयर लीग के कमिश्नर हैं,यू0पी0सी0ए0(उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसियेशन) के सचिव हैं। इसके अलावा वे केन्द्र में मंत्री भी हैं, तथा इलैक्ट्रानिक चैनल न्यूज-24 भी उनके दिशा निर्देशन में चलता है,क्योंकि उनकी पत्नी अनुराधा प्रसाद इस चैनल की मालकिन हैं और भारतीय जनता पार्टी के नेता रविशंकर प्रसाद की बहन हैं। 
Rajiv Shukla, Indian Premier League (IPL) Commissioner, State Minister of India & VP, BCCI.
 
पहले जब विदेश से टीमें आती थीं और जितने भी चार-पांच मैच होते थे, वे कानपुर, दिल्ली, कलकत्ता, मुम्बई और मद्रास में होते थे। उसमें से एक कानपुर के ग्रीन पार्क स्टेडियम में होना लाजमी था, बाकी छोटे-मोटे मैच दूसरी जगहों पर होते थे। लेकिन भारत का सबसे बड़ा स्टेट, उत्तर प्रदेश और उसमें लाखों क्रिकेट प्रशंसक मौजूद होने के बावजूद कानपुर का ग्रीन पार्क स्टेडियम मैच के नक्शे से गायब कर दिया गया है। क्यों? इसकी पृष्टभूमि में राजीव शुक्ला, ज्योति बाजपेई और बीसीसीआई से मिलने वाली करोड़ों की धनराशि ही मूल वजह है।
यू0पी0क्रिकेट एसोसियेशन वैसे भी उत्तर प्रदेश के समस्त जिलों का प्रतिनिधित्व नहीं करता है और ना ही इसके प्रयास किये जाते हैं कि छूटे हुये जनपदों को विस्तार दिया जाये। प्रयास उत्तर प्रदेश को छोड़कर उत्तराखण्ड में अपने जेबी संगठन बनाने के लिये किये गये हैं, ऐसे ही एक संगठन में राजीव शुक्ला ने अपने भाई को घुसा दिया है। ऐसा ही दिल्ली क्रिकेट एसोसियेशन के अरूण जेटली भी कर रहे हैं, उनकी भी दखलनदाजी उत्तराखण्ड की एक क्रिकेट एसोसियेशन में है। भारत का अकेला राज्य है उत्तराखण्ड जहॉं पर आजतक किसी भी क्रिकेट एसोसियेशन को बीसीसीआई से मान्यता इसलिए नहीं दी जा सकी है क्योंकि बीसीसीआई के किसी न किसी पदाधिकारी के निहितार्थ वहां गठित की गई एसोसियेशन से हैं। 
29 अगस्त 2009 को उत्तराखण्ड राज्य के लिए मान्यता देने के सम्बन्ध में बीसीसीआई की अरूण जेटली की अध्यक्षता वाली एफीलियेशन कमेटी ने विभिन्न एसोसियेशन से साक्षात्कार करने के बाद भी आजतक उसकी रिर्पोट ही सबमिट नहीं की है। यह हाल है क्रिकेट के खेल को प्रमोट करने वाली संस्था बीसीसीआई का, जहां हर नेता किसी न किसी कमेटी का अध्यक्ष बना हुआ है, और अपना-अपना खेल कर रहा है, भले ही क्रिकेट रसातल में चली जाये।
Arun Jaitley,BJP Leader & Official, Delhi & Districts Cricket Association.

इण्डिया सीमेन्ट के मालिक हैं, श्रीनिवासन जो वर्तमान में बीसीसीआई के अध्यक्ष हैं तथा पूर्व में इसके सचिव रह चुके हैं। इण्डिया सीमेन्ट की टीम चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान हैं एम.एस.धौनी,जो इसी के साथ-साथ भारत की क्रिकेट टीम के भी कप्तान हैं। कुल मिलाकर बीसीसीआई के आस-पास एक नेक्सस बन गया है जिसके कारण टीम के चयन में भाई-भतीजाबाद और भ्रष्टाचार चरमोत्कर्ष पर पहुंच गया है।
उत्तर प्रदेश के क्रिकेट प्रेमियों को उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसियेशन की अक्षमता के लिए एक पीआईएल अवश्य दाखिल करनी चाहिए। मोहाली तक में मैच आयोजित होते हैं और इतना बड़ा उत्तर प्रदेश इससे अछूता रहता है, वह भी तब जबकि यहां पहले से ही टेस्ट मैच आयोजित होते रहे हैं। पहला वनडे 29 नवम्बर को खेला जायेगा। नजा़रा स्टेडियम के खाली रहने तक ही सीमित नहीं है। टी0वी0 पर मैच देखने वालों में भी कमी आई है। अब लोगों का उत्साह स्कोर जानने तक ही सीमित होता जा रहा है, जो धीरे-धीरे अपने अन्त की ओर है। 
क्रिकेट की सीरीज ने अपने को हॉकी की सीरीज में तब्दील कर लिया है, जबकि हॉकी की ऐसी स्थिति उसका कोई पोषक न होने के कारण हुई है और क्रिकेट की ऐसी स्थिति पोषक होने के साथ-साथ अत्यधिक शोषक पैदा हो जाने के कारण हो रही है।
आगे हम आपको विस्तार से विभिन्न क्रिकेट एसोसियेशन विशेषकर लखनऊ क्रिकेट एसोसियेशन के बारे में तफसील से बतायेंगे। यदि आपके पास भी क्रिकेट के मुताल्लिक कोई जानकारी हो अथवा कुछ कहना चाहते हों तो jnnnine@gmail.com पर सम्पर्क कर सकते हैं।
सतीश प्रधान

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