Tuesday, 6 December 2011

खेल से कोसों दूर हैं खेल फेडरेशन

          सिडनी ओलम्पिक की कांस्य पदक विजेता और इंडियन वेटलिफ्टिंग फेडरेशन की वाइस प्रेसिडेन्ट पदमश्री कर्णम मल्लेश्वरी के  त्यागपत्र देने से पूरा खेल जगत और खेलप्रेमी स्तब्ध हैं। पदमश्री कर्णम मल्लेश्वरी ने इस्तीफा देने की वजह फेडरेशन में खेल की समझ न रखने वालों का बोलबाला और खेल की बजाय राजनीति का हावी होना बताया है।
          दरअसल फेडरेशन, खिलाड़ियों के लिए काम ही नहीं कर रही है। इण्डियन वेटलिफ्टिंग फेडरेशन के प्रेसीडेन्ट बी0पी0वैश्य को खेल की नाम मात्र की भी समझ नहीं है,इसके बावजूद फेडरेशन में उन्ही की तूती बोलती है। सीनियर व दिग्गज खिलाड़ी कह रहे हैं कि किसी भी खेल का नेशनल फेडरेशन अच्छे खिलाड़ियों को किसी पद पर देख ही नहीं सकता। एक न एक दिन ऐसी नौबत आनी ही थी। उधर,मल्लेश्वरी कह रहीं हैं कि फेडरेशन में उनका दम घुट रहा था। वहीं वेटलिफ्टिंग फेडरेशन के सचिव कह रहे हैं कि फेडरेशन ठीक से काम कर रहा है। उनका कहना है कि मल्लेश्वरी ने इस्तीफा दिया है, यह उनकी मर्जी है। किसी ने इस्तीफे के लिए उन पर दबाव नहीं बनाया है, इसका सीधा मतलब है कि उनकी फेडरेशन में दबाव भी बनाया जाता है।
          पदमश्री कर्णम मल्लेश्वरी का कहना है कि पहले यही फेडरेशन वाले गुजारिश कर रहे थे कि वह फेडरेशन में आएं, जिससे उनके अनुभव का फायदा फेडरेशन और देश के उभरते हुए वेटलिफ्टरों को मिल सके। वर्ष 2009 में वह उपाध्यक्ष के रूप में फेडरेशन से जुड़ भी गईं,लेकिन बाद में फेडरेशन ने उनकी एक न सुनी। उन्होंने जब भी फेडरेशन के पदाधिकारियों की कार्यशैली पर अंगुलि उठाई तो वे उनसे नाराज होने लगे। पिछले दो सालों में इन पदाधिकारियों ने ऐसा माहौल तैयार कर दिया कि उन्हें मजबूरन फेडरेशन से अपने को अलग करना पड़ा। उन्होंने कहा कि यहॉं चाहकर भी खिलाड़ियों का भला नहीं किया जा सकता। उन्होंने कई बार खेल की बेहतरी के लिए सुझाव दिये, लेकिन उन्हें दरकिनार कर दिया गया। उनका कहना है कि फेडरेशन के अधिकारियों ने अन्य महिला वेट लिफ्टरों पर दबाव बनाया कि वे मल्लेश्वरी से नाता न रखें। नाता रखने वालों का कैरियर खराब किये जाने की धमकी भी दी जाती थी। ऐसी परिस्थितियों में कैसे कोई काम कर सकता है,इससे बेहतर था कि इस्तीफा दे दिया जाये और मैंने अपना इस्तीफा खेल मंत्री, और फेडरेशन को दे दिया है।
          वहीं फेडरेशन के सचिव सहदेव सिंह आरोप लगाते हैं कि कोई चाहे जितना बड़ा खिलाड़ी हो लेकिन जब वह किसी संगठन में रहेगा तो उसे उसके कायदे-कानून भी मानने पड़ेंगे। सहदेव सिंह का आरोप है कि मल्लेश्वरी न तो फेडरेशन की बैठकों में हिस्सा लेती थीं और न ही वेटलिफ्टिंग के सुधार के लिए कोई सुझाव देती थीं। शायद सहदेव सिंह को भी क्रिकेट एसोसियेशन के राजीव शुक्ला की तरह झूंठ बोलने की आदत पड़ गई है,इसीलिए वह कह रहे हैं कि कर्णम,फेडरेशन की बैठक में हिस्सा नहीं लेती थीं। यदि कर्णम बैठकों में हिस्सा न लेती होतीं तो उन्हें इस्तीफा देने की जरूरत ही नहीं पड़ती क्योंकि तब तो फेडरेशन उन्हें बड़ी आसानी से बाहर का रास्ता दिखा सकता था। तब उसके पास कहने को भी होता कि बैठकों में भाग न लेने के कारण कर्णम को बर्खास्त कर दिया गया है।
          सहदेव सिंह का कहना है कि यही नहीं फेडरेशन ने पिछले कुछ माह में जो कदम उठाए हैं उनसे भी मल्लेश्वरी खुश नहीं थीं। आखिरकार खेल संघों में कौन से ऐसे कदम उठाये जा रहे हैं जिनसे खिलाड़ी ही खुश और संतुष्ट नहीं हो पा रहे हैं? यदि वास्तव में ऐसा है तो ऐसे कदम उठाने की आवश्यकता ही क्या है? 400मी. हर्डल के पूर्व राष्ट्रीय रिकार्डधारी भुवन सिंह कहते हैं कि फेडरेशन में ऐसे-ऐसे लोग हैं जिनके साथ खिलाड़ियों का काम करना मुश्किल है। नब्बे के दशक के आखिरी सालों में ऑल इंग्लैण्ड चैम्पियन बैडमिंटन खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण उस समय के बैडमिंटन संघ की कार्यशैली से खिन्न थे। उन्होंने नया संघ बनाया लेकिन अंततः उन्हें उस समय के बैडमिंटन संघ के सामने हथियार डालने पड़े। इसी तरह हॉकी खिलाड़ी गुरबक्श सिंह व परगट सिंह या कई बड़े एथलीटों को राष्ट्रीय संघों ने जगह नहीं दी।
          पादुकोण की कहानी ठीक उ0प्र0 के आगरा क्रिकेट संघ से मिलती जुलती है,जिसके सर्वेसर्वा मि0 जी0डी0शर्मा बने हुए हैं,जो राजीव शुक्ला के चेले हैं एवं हुण्डई की डीलरशिप ब्रज हुण्डई के नाम से लिए हुए हैं और उसमें भी हुण्डई वाहनों की सर्विस के नाम पर स्पेयर पार्टस के उल्टे-सीधे बिल बनाकर कस्टमर को ठगते हैं। आगरा क्रिकेट संघ में कोई भी खिलाड़ी न होकर इनके भाई-बिरादर यू0डी0शर्मा और इनके वर्कशाप में काम करने वाले कर्मचारी ही हैं। इन्होंने न तो स्वयं आगरा की क्रिकेट के लिए कुछ किया और ना ही किसी दूसरे को कुछ करने दिया।
          इनके नकारेपन से खीझकर कुछ क्रिकेट खिलाड़ियों ने सात-आठ वर्ष पूर्व आगरा क्रिकेट समिति का गठन किया जिसके अध्यक्ष थे आगरा कालेज के कैप्टन रहे समीर चतुर्वेदी और सचिव थे मधुसूदन मिश्रा, जिन्होंने आगरा में कईएक टूर्नामेन्ट आयोजित कराये। आगरा में क्रिकेट को प्रोत्साहित करने के लिए इस समिति का सह्योग दिया रणजी प्लेयर सर्वेश भटनागर,जो कि रेलवे की टीम से खेलते थे, के साथ रेलवे की टीम के नेगी, धीरज शर्मा, रमन दीक्षित, जीत सिंह, और रेलवे रणजी टाफी के कोच, के0के0शर्मा ने। यह जानकारी जब मि0 जी0डी0शर्मा को हुई तो उन्होंने वकील के माध्यम से रेलवे को इन खिलाड़ियों के खिलाफ शिकायत करवा दी और रेलवे से शो काज़ नोटिस इन खिलाड़ियों को भिजवा दिया कि क्यों न रेलवे से अन्यत्र किसी और टीम में खेलने के लिए उनके खिलाफ कार्रवाई की जाये?
          खिलाड़ी तो बेचारे ठहरे खिलाड़ी! वे क्या जानें गुणा-भाग का खेल,वे डर गये और उन्होंने आगरा क्रिकेट समिति की ओर से खेलना छोड़ दिया। किसी तरह से वह समिति सात-आठ साल तक सरवाइव कर पाई क्योंकि उसे ना तो यू0पी0सी0ए0 ने कोई तवज्जो दी ना ही किसी प्रकार की आर्थिक मदद। जी0डी0शर्मा गैंग के ही कैलाश नाथ टण्डन जो कि चालीस वर्षो से आगरा क्रिकेट संघ में सचिव के पद पर कब्जा जमाये थे अब यू0पी0सी0ए0 के उपाध्यक्ष बना दिये गये हैं। ये सारे वे पदाधिकारी हैं,जिन्हें क्रिकेट का बल्ला भी ठीक से पकड़ना नहीं आता और ना ही क्रिकेट की ए0बी0सी0डी0 आती है,लेकिन राजीव शुक्ला,ज्योति बाजपेई,मि0 पाठक और उघोगपति सिंहानिया की बदौलत क्रिकेट संघों पर मकड़ी की तरह कब्जा जमाये बैठे हैं।
          ध्यान रहे मि0 जी0डी0शर्मा ने यू0पी0सी0ए0 के राजीव शुक्ला को हुण्डई की एक सेडान कार गिफ्ट की है और यहॉं भी वे अपनी हरकतों से बाज नहीं आये। एक अन्य व्यापारी को इन्होंने यह कहकर फंसाया कि भाई तू एक कार शुक्ला जी को गिफ्ट करदे, तेरा काम उनसे करा दूंगा! कार अपने शोरूम से दे देता हूँ जो ज्यादा से ज्यादा छूट दे सकता हूँ दे दूंगा। यानी कार गिफ्ट की खुद और ठग लिया दूसरे व्यापारी को। वापस आता हूँ पदमश्री कर्णम मल्लेश्वरी के इस्तीफे पर प्रगट की गई प्रतिक्रिया पर, इनकी कहानी क्रिकेट के इतिहास में प्रगट करूंगा।

‘‘यदि मल्लेश्वरी ने अपने पद से इस्तीफा दिया है तो कहीं न कहीं कोई सच्चाई जरूर होगी। सहदेव सिंह मनमर्जी करता होगा। इतने बड़े वेटलिफ्टर का संघ से अलग होना दुःख की बात है।
.....हरभजन सिंह,पूर्व अध्यक्ष,आई.डब्ल्यू.एल.एफ.

‘‘मैं यह नहीं कह सकता कि कौन गलत है और कौन सही। लेकिन पदमश्री कर्णम मल्लेश्वरी के फेडरेशन से हटने का एक गलत संदेश देश भर में जाएगा,जिससे वेटलिफ्टिंग का ही नुकसान होगा।
.....ललित पटेल, लक्ष्मण पुरस्कार विजेता
          इस स्तम्भकार का कहना है कि भारत के खेल मंत्री अजय माकन को इस ओर देखना चाहिए और अपने मंत्रालय को प्रभावी बनाना चाहिए वरना सारे फेडरेशन बीसीसीआई की राह पर चल निकलेंगे,जिससे खेल की तो ऐसी की तैसी ही हो जायेगी। देखा जाना चाहिए कि किस फेडरेशन को कितना अनुदान भारत सरकार का खेल मंत्रालय देता है और उसका इस्तेमाल किस मद में,कैसे और कौन कर रहा है। (सतीश प्रधान)

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