Saturday, 18 February 2012

ऐलोपैथ के दम का नहीं, सब कुछ

          सोनिया गॉंधी द्वारा अपरोक्ष रूप से संचालित मनमोहन सरकार जहॉं एक ओर बाबा रामदेव को परेशान करके उन्हें बेइज्जत करने और उन्हें बदनाम करने का कोई मौका न चूकने का प्रयत्न करती है, वहीं दूसरी ओर भारत का केन्द्रीय योजना आयोग, आयुर्वेद एवं योग गुरू बाबा रामदेव के गुणों एवं उनकी गहन जानकारी का इस्तेमाल स्वास्थ्य के क्षेत्र में करना चाहता है। इसीलिए वह चाहता है कि भारत की सरकार योग गुरू बाबा रामदेव की ओर दोस्ती का हांथ बढ़ाए।
          योजना आयोग ने स्वास्थ्य क्षेत्र में ऐसी कई सिफारिशें की हैं। उसने ऐलोपैथ डॉक्टरों को भी आयुर्वेद और योग के नुस्खे पढ़ाने को बेहद जरूरी बताया है। कहावत है कि जब जागो तभी सवेरा, इसी तर्ज पर कहा जा सकता है कि चलिए देर से ही सही, योजना आयोग को यह सोचने पर मजबूर तो होना पड़ा कि आयुर्वेद और योग हमारी थाती हैं और इससे किसी भी तरह की बीमारी से आसानी से एवं बगैर किसी साइड इफैक्ट के पार पाया जा सकता है। आयुर्वेद हो अथवा होम्योपैथी, इनमें सर्जरी की आवश्यकता ही नहीं होती, इसीलिए बगैर सर्जरी इसके द्वारा सम्पूर्ण इलाज सम्भव है। सर्जरी की आवश्यकता ऐलोपैथ में होती है, इनमें नहीं।
          ऐलोपैथी में सर्जरी की व्यवस्था के ही कारण मानवअंग तस्करी जोर-शोर से फलफूल रही है। आज के समय में किसी की भी किडनी निकाल लेना कोई बड़ी बात नहीं है। अभी हाल ही में ऐसा मामला लखनऊ में पकड़ा गया है जहॉं बिल्कुल बेवकूफ बनाकर कई लोगों की किडनी निकाल ली गई। नोएडा का बहुचर्चित निठारी काण्ड भी इसी का नतीजा था, लेकिन इसके तस्कर देश के समाने नहीं लाये गये, क्योंकि वे नामचीन लोग थे।
          योजना आयोग की स्वास्थ्य सम्बन्धी संचालन समिति ने 12वीं पंचवर्षीय योजना के दौरान हर हिन्दुस्तानी तक इलाज के साधनों को मुहैय्या करवाना बेहद जरूरी बताया है। उसने सारे तथ्य एकत्र कर यह निष्कर्ष निकाला है कि सिर्फ ऐलोपैथी के दम पर यह काम पूरा किया जाना मुश्किल ही नहीं असम्भव है। इस लिहाज से आयुर्वेद, योग, यूनानी और होम्योपैथी जैसी इलाज की विधियों की अधिक से अधिक मदद ली जानी चाहिए। अपनी सिफारिश में उसने पारम्परिक चिकित्सा पद्वतियों में काम कर रहे बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ जैसे गैर-सरकारी संगठन के काम को बढ़ावा देने के लिए इनकी मदद करने को बेहद जरूरी बताया है। सरकार के लिए बाबा रामदेव जैसे योग और आयुर्वेद के गुरूओं की मदद लेना क्यों जरूरी बताया गया है, इस विषय पर आयोग के एक सदस्य का कहना है कि सरकार खुद ही दवा बनाने की विधि तय करे, फिर दवा बनाए, इसके बाद सभी तक इसे पहुचाए और फिर उस पर नज़र भी रखे यह एक तो मुमकिन नहीं, दूसरे यह सरकार का काम भी नहीं है।
          इसी पर मेरा मानना है कि सरकार का काम न तो किसी चीज का उत्पादन करना है, ना ही उसकी मार्केटिंग करना है, ना ही उसका वितरण करना। सरकार का काम तो जनहितकारी नीति बनाना और उसका पालन सुनिश्चित कराना होता है। सरकारें यदि लाभ कमाने के फेर में लग जायेंगी तो हो गया कल्याण! सारे सरकारी निगम इसीलिए बन्दी के कगार पर, जबरदस्त घाटे में और दुखदायी हो गये कि उसमें बैठे सरकारी अधिकारी और उसे देखने वाले मंत्री अपने-अपने लाभ के लिए उस निगम का दोहन करने लगे।
          योजना आयोग से पहली बार ऐसी कोई सिफारिश बाहर आई है, जिससे लगता है कि वास्तव में योजना आयोग यहॉं की जनता के स्वास्थ्य के प्रति फिकरमन्द है। उसका कहना है कि राजनीतिक विरोध अपनी जगह है, लेकिन बाबा रामदेव जैसे कुछ संगठनों और लोगों के योगदान को नकारा नहीं जा सकता है। उसका मानना कि इस सिफारिश की पूर्ति के लिए आयुर्वेद, योग, यूनानी और होम्योपैथी से जुड़े गैर-सरकारी संगठनों को आगे बढ़ाना ही होगा।
          इसी के साथ योजना आयोग चाहता है कि ऐलोपैथ के डॉक्टर अब योग और आयुर्वेद से नाक-भौं सिकोड़ना बन्द कर खुद भी अपने मरीजों पर इन्हें आजमाएं। आयोग ने साफ तौर पर सिफारिश की है कि ऐलोपैथी चिकित्सा के एमबीबीएस पाट्यक्रम में योग और आयुर्वेद को भी शामिल किया जाये। योजना आयोग के अनुसार आयुर्वेद, योग, यूनानी, और होम्योपैथी जैसी पद्वतियों को शामिल करते हुए अनिवार्य स्वास्थ्य पैकेज और लोक स्वास्थ्य के आदर्श माड्यूल तैयार किए जाएं और उन्हें इन पाठ्यक्रमों में शामिल किया जाये।
प्रतिष्ठित सरकारी एवं प्राइवेट अस्पतालों का हवाला देते हुए उसने कहा है कि एम्स जैसे अस्पतालों में भी आयुर्वेद और योगा जैसी पद्वतियों के विशेषज्ञों को जरूर शामिल किया जाये। इलाज के साथ ही गम्भीर बीमारियों के मामले में उसके बाद की देख-भाल के लिए भी इसे जरूरी बताया है। वर्तमान में भारत में पारम्परिक चिकित्सा पद्वति के 7.87 लाख डॉक्टर रजिस्टर्ड हैं। देशभर में ऐसे 3277 अस्पताल, 24289 दवाखाने, 489 कॉलेज और 8644 दवा निर्माण इकाईयां चल रही हैं।
          अन्त में आपको ऐसे आयुर्वेद विशेषज्ञ चिकित्सक के बारे में संक्षेप में बता दूं, जिन्होंने अपनी योग्यता, अनुभव एवं हुनर के बल पर किंग जार्ज मेडीकल कॉलेज और संजय गॉंधी आर्युविज्ञान संस्थान से कैन्सर एवं अन्य गम्भीर बीमारी से ग्रस्त ऐसे मरीजों (अन्तिम समय में यह कहकर लौटाये गये मरीज कि अब इन्हें घर ले जाइये और ऊपर वाले को याद कीजिए) को जिनका अन्त समय निकट था, आयुर्वेद चिकित्सा पद्वति के बल पर न केवल उनके जीवन को आगे बढ़ाया बल्कि उन्हें ठीक भी किया है। उनके इसी प्रयास पर आर्युविज्ञान संस्थान के महानिदेशक उनसे मिलने और उन्हें धन्यवाद देने उनके घर तक गये। ऐसे महान आयुर्वेद चिकित्सक के बारे में पूरी पोस्ट अलग से प्रस्तुत की जायेगी, जिससे गम्भीर बीमारी से जूझ रहे मरीजगण उसका लाभ उठा सकें। (सतीश प्रधान)

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